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जागेश्वर धाम

प्रसिद्ध मंदिर · उत्तराखंड

जागेश्वर धाम

उत्तराखंड की कुमाऊं पहाड़ियों में प्राचीन शिव मंदिरों की एक घाटी

19 अक्टूबर 2026 को 2 स्रोतों से जांचा गया3 मिनट में पढ़ें

कैसे पहुंचें

  • हवाई जहाज़ से

    पंतनगर हवाई अड्डा इस मंदिर के सबसे नज़दीकी हवाई अड्डों में से एक है।

  • ट्रेन से

    सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो 125 किमी दूर है।

  • सड़क से

    जागेश्वर को अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ (88 किमी), हल्द्वानी (131 किमी) और काठगोदाम से सीधी सड़कें जोड़ती हैं। इन जगहों से राज्य की बसें, जीप और टैक्सी नियमित चलती हैं।

Google Maps में खोलें

भक्त यहां क्यों आते हैं

जागेश्वर धाम शिव को समर्पित प्राचीन मंदिरों का एक समूह है, जो कुमाऊं क्षेत्र में अल्मोड़ा से 36 किमी उत्तर-पूर्व में है। इस परिसर में लगभग 125 मंदिर हैं, और उनकी आयु के अनुमान बहुत अलग-अलग हैं। यह शैव परंपरा के धामों में से एक है।

कहानियों के अनुसार, 8वीं सदी के दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने मूल मंदिर का पुनरुद्धार किया था। एक और प्रचलित सिद्धांत कहता है कि उन्होंने कुछ मंदिर बनवाए थे, लेकिन इस दावे का कोई लिखित या शिलालेखीय प्रमाण नहीं है।

मंदिरों और स्तंभों के अनुमानित काल 7वीं से 12वीं सदी तक के हैं, और ये अनुमान काफी अलग-अलग हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहां 12वीं सदी से पहले बने लगभग 151 संरक्षित स्मारकों की गिनती की है। माना जाता है कि गुजरात जैसे स्थानों से आए साधु और प्रवासी ऊंचे पहाड़ों में बस गए और जागेश्वर को एक समय लकुलीश शैव परंपरा का केंद्र बनाया।

जागेश्वर मंदिर पूरे भारत में प्रचलित नागर शैली में बना है, और कुछ विवरण इसे 8वीं सदी का बताते हैं। स्थल के साक्ष्य बताते हैं कि मुख्य मंदिर संभवतः 12वीं या 13वीं सदी में बना और कुछ बार दोबारा बनाया गया। अधिकतर गर्भगृह केवल लगभग 3 वर्ग फुट के हैं, जो एक पुजारी के बैठने के लिए बहुत छोटे हैं।

त्योहार

  • श्रावण मास, अगस्तजागेश्वर मानसून मेला

    पवित्र श्रावण मास में लगने वाला मानसून मेला।

  • आम तौर पर फरवरी या मार्चशिवरात्रि मेला

    रंग-बिरंगा बसंत मेला।

यात्रा के लिए सुझाव

  • परंपरा के अनुसार यात्री मुख्य मंदिर में पूजा शुरू करने से पहले ब्रह्म कुंड में स्नान करते हैं।
  • परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संग्रहालय है, जिसमें घाटी में मिली 150 से अधिक मूर्तियां रखी हैं।

घर बैठे दर्शन

अभी ऐप में नहीं

जागेश्वर धाम अभी Divya Darshan 360 ऐप में नहीं है। ये प्रसिद्ध मंदिर ऐप में हैं, जिनके दर्शन वीडियो आप घर पर देख सकते हैं:

ऐप मुफ़्त है, सिर्फ़ Android पर। ऐसे दर्शन के लिए जैसे आप वहीं खड़े हों, VR बॉक्स देखें (₹899, या कैश ऑन डिलीवरी पर ₹949)।

लोगों के सवाल

क्या जागेश्वर धाम एक मंदिर है या कई?

यह एक घाटी में लगभग 125 मंदिरों का समूह है, कोई एक अकेला मंदिर नहीं।

जागेश्वर धाम कितना पुराना है?

अनुमान अलग-अलग हैं। सरकारी पर्यटन पृष्ठ जागेश्वर मंदिर को 8वीं सदी का बताता है। स्थल के साक्ष्य बताते हैं कि मुख्य मंदिर संभवतः 12वीं या 13वीं सदी में बना और कुछ बार दोबारा बनाया गया।

जागेश्वर के मंदिर किसने बनवाए?

कहानियों के अनुसार आदि शंकराचार्य ने मूल मंदिर को पुनर्जीवित किया। औपनिवेशिक काल के कुछ अनुमान कत्यूरी या चंद राजवंशों का नाम लेते हैं। इनके पक्ष या विपक्ष में कोई लिखित या शिलालेखीय प्रमाण नहीं है।

क्या जागेश्वर धाम संरक्षित स्थल है?

हां। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 12वीं सदी से पहले बने लगभग 151 संरक्षित स्मारकों की गिनती की है।

हमने यह पेज कैसे जांचा

19 अक्टूबर 2026 को हमने इस पेज की हर जानकारी इन स्रोतों से जांची, पहले आधिकारिक स्रोतों से। जो पुष्ट नहीं हो सका, वह पेज पर नहीं है।

  1. Jageshwar Dham, Incredible India (Government of India) incredibleindia.gov.in
  2. Jageshwar, Wikipedia en.wikipedia.org

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