भक्त यहां क्यों आते हैं
कणिपाकम विनायक मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के कणिपाकम गांव में गणेश जी का मंदिर है। यह चित्तूर शहर से लगभग 11 किमी दूर है। यहां के देवता श्री वरसिद्धि विनायक को स्वयंभू माना जाता है। वे एक कुएं में विराजमान हैं, जिसका पानी कभी नहीं सूखता।
कणिपाकम नाम दो शब्दों से बना है। कणि का अर्थ है लगभग सवा एकड़ ज़मीन, और पाकम का अर्थ है उसमें पानी का बहाव। यह नाम मंदिर की कथा से जुड़ा है।
तीन भाई, जो गूंगे, बहरे और अंधे थे, एक छोटे खेत में खेती करते थे। एक दिन कुआं गहरा करते समय उनके औज़ार से एक कठोर वस्तु टकराई। उसमें से खून बहने लगा और पानी लाल हो गया। कथा के अनुसार, तीनों भाई तब ठीक हो गए।
गांव वालों ने कुएं में गणेश की मूर्ति देखी। वे उसके आधार तक कभी नहीं पहुंच सके। उन्होंने इसे स्वयंभू, यानी अपने आप प्रकट हुई, माना और नारियल चढ़ाए। कहा जाता है कि उन नारियलों का पानी उस खेत की लगभग सवा एकड़ ज़मीन पर बह गया।
भक्तों का मानना है कि सालों में मूर्ति बढ़ती गई है। लगभग 50 साल पहले बना चांदी का कवच अब फिट नहीं होता, और पानी के ऊपर केवल घुटने और पेट दिखते हैं। मंदिर 11वीं सदी की शुरुआत में चोल राजा कुलोत्तुंग प्रथम ने बनवाया था, और 1336 में विजयनगर शासकों के समय इसका विस्तार हुआ।

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