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नीलकंठ महादेव मंदिर
Photo: Anurodhraghuwanshi, CC BY-SA 3.0, via Wikimedia Commons

प्रसिद्ध मंदिर · उत्तराखंड

नीलकंठ महादेव मंदिर

नीलकंठ रूप में शिव, पौड़ी गढ़वाल में ऋषिकेश के पास जंगल का मंदिर

19 अक्टूबर 2026 को 2 स्रोतों से जांचा गया2 मिनट में पढ़ें

कैसे पहुंचें

  • सड़क से

    मंदिर ऋषिकेश से बैराज मार्ग से 32 किमी दूर है, या राम झूला होकर 22 किमी। जिला मुख्यालय पौड़ी मंदिर से लगभग 120 किमी दूर है।

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भक्त यहां क्यों आते हैं

नीलकंठ महादेव मंदिर पौड़ी गढ़वाल जिले में ऋषिकेश के पास एक शिव मंदिर है, जो घने जंगल से घिरा है। यहां शिव की पूजा शिवलिंग के रूप में होती है। यह मंदिर उस विष की कथा से जुड़ा है जो शिव ने पिया था।

नीलकंठ का अर्थ है नीले कंठ वाले। शिव इसी नाम से जाने जाते हैं। कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत के लिए समुद्र मंथन किया, तब निकले हलाहल विष को शिव ने पी लिया था। यह मंदिर शिव के एक रूप, नीलकंठ को समर्पित है, और यहां मुख्य देवता के रूप में शिवलिंग विराजमान है। कथा यह भी कहती है कि शिव ने यहां पंचपानी वृक्ष के नीचे 60 हज़ार वर्षों तक तपस्या की थी।

यह मंदिर उस स्थान पर है जहां पंकजा और मधुमती नदियां मिलती हैं। इसके चारों ओर मणिकूट, ब्रह्मकूट और विष्णुकूट की घाटियां हैं। इसकी वास्तुकला पर द्रविड़ शैली का गहरा प्रभाव है। शिखर पिरामिड की तरह परतों में ऊपर उठता है, और उस पर नक्काशी और फ्रीज़ बने हैं। शिखर की मूर्तियों में समुद्र मंथन का दृश्य दिखाया गया है। यह मंदिर हिंदू तीर्थयात्रियों का लोकप्रिय स्थल है, और इसका परिसर घने जंगल से घिरा है।

महाशिवरात्रि यहां का सबसे प्रमुख त्योहार है, और फरवरी या मार्च में बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। दूसरा मेला श्रावण मास में, जुलाई या अगस्त में लगता है। इस मेले में कांवड़िये हरिद्वार से पैदल चलकर मंदिर पहुंचते हैं। परिसर में एक प्राकृतिक जलधारा भी है, जहां भक्त आम तौर पर मंदिर में प्रवेश से पहले स्नान करते हैं।

त्योहार

  • फरवरी-मार्चमहाशिवरात्रि

    मंदिर का सबसे प्रमुख त्योहार, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

  • जुलाई-अगस्त, श्रावण मासश्रावण मेला

    इस मेले के दौरान कांवड़िये हरिद्वार से मंदिर तक पैदल आते हैं।

यात्रा के लिए सुझाव

  • भक्त आम तौर पर मंदिर परिसर की प्राकृतिक जलधारा में स्नान करके भीतर प्रवेश करते हैं।
  • मंदिर के ऊपर का ऊंचा शिखर भाग देवताओं और असुरों के समुद्र मंथन की नक्काशी से सजा है।

घर बैठे दर्शन

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लोगों के सवाल

इस मंदिर का नाम नीलकंठ क्यों पड़ा?

नीलकंठ का अर्थ है नीले कंठ वाले। कथा के अनुसार शिव ने समुद्र मंथन से निकला विष पी लिया था।

नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश से कितनी दूर है?

यह ऋषिकेश से बैराज मार्ग से 32 किमी दूर है, या राम झूला होकर 22 किमी।

नीलकंठ महादेव मंदिर का मुख्य त्योहार कब होता है?

फरवरी या मार्च में महाशिवरात्रि यहां का सबसे प्रमुख त्योहार है। जुलाई या अगस्त का श्रावण मेला दूसरा बड़ा अवसर है।

नीलकंठ महादेव मंदिर ठीक कहां है?

यह उस स्थान पर है जहां पंकजा और मधुमती नदियां मिलती हैं। इसके चारों ओर मणिकूट, ब्रह्मकूट और विष्णुकूट की घाटियां हैं।

हमने यह पेज कैसे जांचा

19 अक्टूबर 2026 को हमने इस पेज की हर जानकारी इन स्रोतों से जांची, पहले आधिकारिक स्रोतों से। जो पुष्ट नहीं हो सका, वह पेज पर नहीं है।

  1. Tourist Places, District Pauri Garhwal (Government of Uttarakhand) pauri.nic.in
  2. Nilkanth Mahadev, Wikipedia en.wikipedia.org

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