भक्त यहां क्यों आते हैं
मन्नारगुडी का राजगोपालस्वामी मंदिर तमिलनाडु के बड़े वैष्णव मंदिरों में से एक है, जहां कृष्ण को राजगोपाल के रूप में पूजा जाता है। इसे दक्षिण द्वारका, यानी दक्षिण की द्वारका कहा जाता है। यह 23 एकड़ में फैला है और इसका गोपुरम 154 फुट ऊंचा है। दर्शन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक होता है।
मन्नारगुडी इसी मंदिर के आसपास बसा। परंपरा कहती है कि यहां विष्णु ने पुंडरीकाक्ष के रूप में कृष्ण बनकर दो ऋषियों, गोपिला और गोप्रालय, को दर्शन दिए थे। इसी कारण इस कस्बे को दक्षिण द्वारका कहते हैं। मुख्य गर्भगृह में परवासुदेव पेरुमाल हैं, उनके साथ श्रीदेवी और भूदेवी हैं। उत्सव मूर्ति विद्या राजगोपालन है, जो रुक्मिणी और सत्यभामा के साथ बैठे ग्वाले कृष्ण हैं।
इस मंदिर को सबसे पहले चोल राजा कुलोत्तुंग प्रथम ने बनवाया था। बाद के चोल राजाओं ने इसमें और निर्माण करवाया, और 16वीं सदी में तंजावुर के नायकों ने इसे और बढ़ाया। आज इसमें 16 गोपुरम, 7 प्रकार और 24 देवालय हैं, जिनमें सेंगमाला थायार का देवालय भी शामिल है। इसकी ऊंची ग्रेनाइट की दीवार की तमिल में प्रशंसा होती है, मन्नारगुडी मथिल अझगु, यानी मन्नारगुडी की दीवारों की सुंदरता।
मंदिर के सामने गरुड़ स्तंभ और राजगोपुरम इस कस्बे की पहचान हैं। बाहर हरिद्रा नदी है, एक 23 एकड़ का तालाब, जो भारत के सबसे बड़े मंदिर तालाबों में से एक है।

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