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मां राज राजेश्वरी मंदिर, चूलागढ़

शक्तिपीठ · उत्तराखंड

मां राज राजेश्वरी मंदिर, चूलागढ़

टिहरी गढ़वाल में चूलागढ़ पहाड़ी पर मां राज राजेश्वरी का सिद्धपीठ

15 अक्टूबर 2026 को maarajrajeshwarimandir.org से जांचा गया3 मिनट में पढ़ें

कैसे पहुंचें

  • हवाई जहाज़ से

    देहरादून के पास जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, जिला मुख्यालय नई टिहरी से 86 किमी दूर है। वहां से आगे टिहरी गढ़वाल के लिए टैक्सी और कैब चलती हैं।

  • ट्रेन से

    ऋषिकेश सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो नई टिहरी से 72 किमी दूर है। ऋषिकेश से जिले के लिए बसें और कैब मिलती हैं।

  • सड़क से

    छोटे शहर चामियाला की ओर जाएं। मंदिर चामियाला से लगभग 15 किमी और मंद्रा गांव से 3 किमी दूर है।

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भक्त यहां क्यों आते हैं

मां राज राजेश्वरी मंदिर टिहरी गढ़वाल में चूलागढ़ पहाड़ी पर है। यह चामियाला से लगभग 15 किमी और मंद्रा गांव से 3 किमी दूर है। यहां की देवी त्रिपुर सुंदरी हैं, जो दस महाविद्याओं में से एक हैं, और टिहरी के राजपरिवारों द्वारा लंबे समय से पूजी जाती रही हैं। ट्रस्ट के अनुसार दर्शन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक होते हैं।

ट्रस्ट बताता है कि यह मां दुर्गा का दैवीय अस्त्र है, जिसे शक्ति शास्त्र कहते हैं। सत्य युग में देवताओं और असुरों के युद्ध के समय यह आकाश में उड़कर चूलागढ़ पहाड़ी पर आ गिरा। तलवार जैसा और किसी अज्ञात धातु से बना यह अस्त्र आज भी गर्भगृह में रखा है। मां राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी हैं, जिन्हें षोडशी और ललिता भी कहते हैं। स्कंद पुराण के केदार खंड में इसी नाम से उनकी स्तुति है।

ट्रस्ट के अनुसार कनक वंश के राजा सत्यसिंध ने 14वीं सदी में मंदिर बनवाया। उनकी राजधानी छतियारा थी, जो 6 किमी दूर है, और वहां आज भी उनके किले और महल के खंडहर खड़े हैं। टिहरी रियासत के शासकों ने देवी की पूजा की और उनकी सेवा करने वाले परिवारों के लिए ज़मीन दी।

पूजा मंद्रा गांव के नौटियाल परिवारों के रावल करते हैं। मंदिर अब पारंपरिक शैली में फिर से बनाया जा रहा है। बाहरी ढांचा पूरा हो चुका है और अंदर का काम जारी है।

त्योहार

  • मार्च या अप्रैलचैत्र नवरात्र

    नौ दिनों तक देवी की विशेष पूजा और श्रृंगार।

  • सितंबर या अक्टूबरशारदीय नवरात्र

    साल का दूसरा नवरात्र, जिसमें देवी की विशेष पूजा और श्रृंगार होता है।

  • मई या जूनगंगा दशहरा जात

    हर साल होने वाली सामूहिक जात, जिसमें आसपास की कई पट्टियों से भक्त आते हैं।

यात्रा के लिए सुझाव

  • नवरात्र और जात के दौरान देवी की मूर्तियां चांदी के ढोल और दमाऊ के साथ मंद्रा से चूलागढ़ लाई जाती हैं। इस नजारे के लिए अपनी यात्रा का समय तय करना अच्छा रहेगा।
  • ढोल और दमाऊ छतियारा के गढ़वे बजाते हैं, जो परंपरा से देवी की सेवा करते हैं।
  • परिवार मंदिर में अपनी निजी जात भी कर सकते हैं, जिसमें देवी की पूजा और श्रृंगार होता है।
  • मंदिर के आसपास निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए कुछ अधूरे हिस्से मिल सकते हैं।

घर बैठे दर्शन

अभी ऐप में नहीं

मां राज राजेश्वरी मंदिर, चूलागढ़ अभी Divya Darshan 360 ऐप में नहीं है। ये शक्तिपीठ ऐप में हैं, जिनके दर्शन वीडियो आप घर पर देख सकते हैं:

ऐप मुफ़्त है, सिर्फ़ Android पर। ऐसे दर्शन के लिए जैसे आप वहीं खड़े हों, VR बॉक्स देखें (₹899, या कैश ऑन डिलीवरी पर ₹949)।

लोगों के सवाल

टिहरी गढ़वाल में राज राजेश्वरी मंदिर कहां है?

यह चूलागढ़ पहाड़ी पर है, चामियाला से लगभग 15 किमी और मंद्रा गांव से 3 किमी दूर। ट्रस्ट का पता चूलागढ़, छतियारा, उत्तराखंड 249125 है।

मां राज राजेश्वरी कौन हैं?

वे त्रिपुर सुंदरी हैं, दस महाविद्याओं में से एक, जिन्हें षोडशी और ललिता भी कहते हैं। टिहरी रियासत के राजपरिवार उनकी पूजा करते थे।

चूलागढ़ का मुख्य त्योहार कब होता है?

गंगा दशहरा पर होने वाली सामूहिक जात हर साल का मुख्य त्योहार है। चैत्र और शारदीय, दोनों नवरात्र में भी विशेष पूजा होती है और मंद्रा से शोभायात्रा निकलती है।

मंदिर में पूजा कौन करता है?

मंद्रा गांव के नौटियाल परिवारों के रावल पूजा करते हैं, जैसा परंपरा से होता आया है।

हमने यह पेज कैसे जांचा

15 अक्टूबर 2026 को हमने इस पेज की हर जानकारी इन स्रोतों से जांची, पहले आधिकारिक स्रोतों से। जो पुष्ट नहीं हो सका, वह पेज पर नहीं है।

  1. Maa Raj Rajeshwari Mandir Trust, official site maarajrajeshwarimandir.org
  2. Maa Raj Rajeshwari Mandir Trust, History of Temple maarajrajeshwarimandir.org
  3. Maa Raj Rajeshwari Mandir Trust, Customs and Traditions maarajrajeshwarimandir.org
  4. District Tehri Garhwal, How to Reach tehri.nic.in

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