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सालासर बालाजी मंदिर

प्रसिद्ध मंदिर · राजस्थान

सालासर बालाजी मंदिर

राजस्थान के सालासर में हनुमान जी बालाजी के रूप में, स्वयंभू मूर्ति

19 अक्टूबर 2026 को 3 स्रोतों से जांचा गया3 मिनट में पढ़ें

कैसे पहुंचें

  • सड़क से

    सालासर राष्ट्रीय राजमार्ग 65 पर सुजानगढ़ के पास है, और जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर भी।

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भक्त यहां क्यों आते हैं

सालासर बालाजी मंदिर राजस्थान के चूरू जिले में, सुजानगढ़ के पास, सालासर कस्बे में स्थित है। यह हनुमान जी के भक्तों के लिए एक प्रमुख पूजा स्थल है, जहां हनुमान जी को बालाजी के रूप में पूजा जाता है। भक्त यहां की मूर्ति को स्वयंभू, यानी स्वयं प्रकट हुई, मानते हैं।

भक्त इस मूर्ति को स्वयंभू, यानी स्वयं प्रकट हुई, मानते हैं, और इस मंदिर को शक्ति स्थल, यानी एक पूजा-स्थल, मानते हैं। भक्त साल भर यहां आते हैं, केवल मेलों के समय ही नहीं। कथा के अनुसार, नागौर के आसोटा गांव के एक गिंथाला जाट किसान अपने खेत में हल चला रहे थे, तभी हल एक पत्थर से टकराया। खुदाई में बालाजी की मूर्ति निकली। उनकी पत्नी ने उनके दोपहर के भोजन के लिए बाजरे का चूरमा बनाया था, और किसान ने वह चूरमा बालाजी को अर्पित किया।

तब से बालाजी को चूरमा चढ़ाना एक परंपरा बन गया है। कथा यह भी कहती है कि हनुमान जी ने एक जमींदार को सपने में दर्शन दिए और कहा कि मूर्ति को सालासर में स्थापित किया जाए। पहला मंदिर मोहनदास महाराज ने मिट्टी और पत्थर से बनवाया था, कारीगर नूरा और दऊ की मदद से। एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, हनुमान जी के भक्त मोहनदास ने लंबे समय तक पूजा और तपस्या की। रिपोर्ट कहती है कि हनुमान जी उन्हें दाढ़ी और मूंछ के साथ दिखाई दिए, और मूर्ति भी उसी रूप में दिखाई जाती है।

लोकप्रिय विवरण के अनुसार मूर्ति की खोज श्रावण शुक्ल नवमी, संवत 1754 (1754 ईस्वी) की है। वर्तमान मंदिर को पूरा होने में दो साल लगे। पूरी इमारत सफेद संगमरमर से ढकी है, और गर्भगृह, सभा मंडप और परिक्रमा मार्ग सोने और चांदी की मोज़ेक कारीगरी से सजे हैं।

त्योहार

  • मार्च से अप्रैल, चैत्र मेंचैत्र पूर्णिमा मेला

    साल के दो बड़े मेलों में से एक, जब मंदिर में खास भीड़ होती है।

  • सितंबर से अक्टूबर, आश्विन मेंआश्विन पूर्णिमा मेला

    साल का दूसरा बड़ा मेला, यह भी बहुत भीड़ वाला होता है।

यात्रा के लिए सुझाव

  • भक्त मंदिर परिसर में लाल मौली धागे से नारियल बांधते हैं।
  • सालासर उस तीर्थ-यात्रा मार्ग का हिस्सा है जिसमें जीण माता, रानी सती और खाटूश्यामजी मंदिर भी शामिल हैं।

घर बैठे दर्शन

अभी ऐप में नहीं

सालासर बालाजी मंदिर अभी Divya Darshan 360 ऐप में नहीं है। ये प्रसिद्ध मंदिर ऐप में हैं, जिनके दर्शन वीडियो आप घर पर देख सकते हैं:

ऐप मुफ़्त है, सिर्फ़ Android पर। ऐसे दर्शन के लिए जैसे आप वहीं खड़े हों, VR बॉक्स देखें (₹899, या कैश ऑन डिलीवरी पर ₹949)।

लोगों के सवाल

सालासर बालाजी मंदिर कहां है?

यह राजस्थान के चूरू जिले में, सुजानगढ़ के पास, सालासर कस्बे में है। यह कस्बा जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर स्थित है।

स्वयंभू का क्या मतलब है?

स्वयंभू का मतलब है स्वयं प्रकट हुआ। भक्त सालासर की मूर्ति के लिए यह शब्द इस्तेमाल करते हैं। कथा के अनुसार, नागौर के आसोटा गांव के एक गिंथाला जाट किसान ने अपने खेत में हल चलाते समय इसे खोदकर निकाला था।

मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ कब होती है?

चैत्र और आश्विन पूर्णिमा मेलों के दौरान। यहां अक्सर छह से सात लाख से ज्यादा लोग आते हैं, इसलिए अगर आप उस समय आ रहे हैं तो भारी भीड़ के लिए तैयार रहें।

इस मंदिर में बालाजी कौन हैं?

बालाजी यहां हनुमान जी के लिए भक्तों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है, जिन्हें बालाजी के रूप में पूजा जाता है, और यह उनके भक्तों के लिए एक प्रमुख पूजा स्थल है।

हमने यह पेज कैसे जांचा

19 अक्टूबर 2026 को हमने इस पेज की हर जानकारी इन स्रोतों से जांची, पहले आधिकारिक स्रोतों से। जो पुष्ट नहीं हो सका, वह पेज पर नहीं है।

  1. Salasar Balaji Temple, Rajasthan Tourism (Government of Rajasthan) tourism.rajasthan.gov.in
  2. Salasar Balaji Temple, Wikipedia en.wikipedia.org
  3. As Gehlot firefights, Sachin Pilot remembers Salasar Balaji temple, Free Press Journal freepressjournal.in

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